अनुसूचित जाति युवक से मारपीट, प्रताड़ना से परेशान होकर की आत्महत्या, पुलिस थाने के चक्कर लगाते रहे परिजन, माहभर बाद भी नहीं मिला इंसाफ, लगाई न्याय की गुहार…

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जिला जांजगीर-चांपा |अनुसूचित जाति युवक से मारपीट, प्रताड़ना से परेशान होकर की आत्महत्या, पुलिस थाने के चक्कर लगाते रहे परिजन, माहभर बाद भी नहीं मिला इंसाफ, लगाई न्याय की गुहार…

• अनुसूचित जाति युवक से मारपीट, प्रताड़ना से परेशान होकर की आत्महत्या।

•पुलिस थाने के चक्कर लगाते रहे परिजन।

• माहभर बाद भी नहीं मिला इंसाफ, लगाई न्याय की गुहार।


किकिरदा से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक अनुसूचित जाति के युवक के साथ कथित रूप से मारपीट, जातिगत अपमान और मानसिक प्रताड़ना के बाद आत्महत्या करने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है, पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार,बिर्रा थाना क्षेत्र के ग्राम किकिरदा निवासी मनबोध चौहान के 27 वर्षीय पुत्र राजकुमार चौहान का गांव की एक युवती के साथ आपसी सहमति से प्रेम संबंध था। इसी बात को लेकर कुछ लोगों द्वारा उससे रंजिश रखी जा रही थी। परिजनों का आरोप है कि 6 मार्च 2026 की रात करीब 11- 12 बजे के बीच गांव के कुछ लोगों ने राजकुमार को सार्वजनिक रूप से लात-घूंसों, लोहे की रॉड और चप्पलों से बेरहमी से पीटा, इस दौरान उसे जातिसूचक गालियां दी गईं और लगातार धमकाया गया।



घटना के बाद युवक गंभीर शारीरिक चोटों के साथ-साथ मानसिक रूप से भी काफी आहत था, परिजनों का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों और प्रताड़ना से परेशान होकर 7 मार्च 2026 की सुबह करीब 5:30 बजे उसने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद आरोपी उनके घर में घुसकर उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं,जिससे पूरा परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

पीड़ित परिजनों ने बताया कि घटना को एक माह बीत जाने के बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, बिर्रा थाना पुलिस द्वारा उन्हें लगातार घुमाया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि वे दो से तीन बार थाने गए, लेकिन हर बार यह कहकर लौटा दिया गया कि पुलिस अन्य कार्यों में व्यस्त है और उनके मामले पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है,
इसके बाद न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार जांजगीर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा, जहां से उन्हें अजाक थाना भेज दिया गया। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत तत्काल मामला दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। अब देखना होगा कि अपने बेटे को खो चुके इस पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या फिर उन्हें यूं ही थानों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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