
•गरियाबंद| ज़हर से बाघ का शिकार मामले में जांच में खुलासा: भतीजे ने ली थी बाघ की सुपारी, अपने भतीजे हिंगुल बाछा (बाघ की सुपारी लेने वाला) एवं स्वयं को कारवाई से बचाने आरोपी जालंधर बागरती ने पूछताछ में अपने भतीजे से भी पल्ला झाड़ा।
•केन्द्रीय एजेंसी वाइल्डलाइफ क्राइम कण्ट्रोल ब्यूरो एवं डी. आर. आई की भी मदद ली जायेगी तस्करों के तार बरगढ़ जिले के खरीददारो तक जुड़े होने की सूचना।
पूछताछ के दौरान सनसनीखेज विडियो में सुपारी देने वाले आरोपी रमन हेरना ने सुपारी लेने वाले आरोपी जालंधर बागरती की आमने-सामने रहकर पहचान की और उसके परिजन हिंगुल बाछा का भी नाम लिया. (विडियो में आरोपी रमन हेरना ने जालंधर बागरती को उसके परिजनो के सामने पहचाना और हिंगुल बाछा का नाम लिया)
जहर से न केवल बाघ, बल्कि वन रक्षक एवं पेट्रोलिंग श्रमिक भी थे ओडिशा के शिकारियों के निशाने पर, एफ.आई.आर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू
7 आरोपी पहले ही वन्यप्राणी अपराध में जेल दाखिल, बाघ की सुपारी लेने वाले आरोपी चाचा-भतीजा को गिरफ्त में लेकर होगी पूछताछ
हिंगुल बाछा की गोपनीय सूचना देने एवं पकडवाने पर 10000 का इनाम उपनिदेशक उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व 7568127875 (सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी)
बाघ की खाल का ठेका लेने वाले आरोपी हिंगुल बाछा (ग्राम कुसुमखूंटा) को गिरफ्त में लेने की कारवाई तेज़, गाँव के एक से अधिक व्यक्ति हो सकते है साजिश में शामिल दल बल के साथ होगी कारवाई
हाल ही में उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में घटित बाघ शिकार प्रकरण में वन विभाग द्वारा कानूनी कार्रवाई को और अधिक सख्त किया गया है। पूछताछ के दौरान सुपारी देने वाले आरोपी रमन हेरना ने सुपारी लेने वाले आरोपी जालंधर बागरती की आमने-सामने रहकर पहचान की और जालंधर के परिजन हिंगुल बाछा का भी नाम लिया. (विडियो में आरोपी रमन हेरना ने जालंधर बागरती को उसके परिजनो के सामने पहचाना और हिंगुल बाछा का नाम लिया जो कि फरार है)
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि वन विभाग द्वारा मुख्य आरोपी रमन हेरना (ओडिशा के शिकारियों द्वारा न केवल बाघ एवं अन्य वन्यजीवों को मारने के उद्देश्य से प्राकृतिक जलस्रोत/जलाशय में विषाक्त पदार्थ मिलाकर उसे जहरीला किया गया था बल्कि उनको इस बात की भी जानकारी थी कि इसी झिरिया का उपयोग वन अमला भी गर्मियों में पानी पीने के लिए करता है जो कि बीहड़ पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है।
वन विभाग द्वारा इस कृत्य को वन्यजीवों, पर्यावरण एवं जनसुरक्षा के विरुद्ध अत्यंत गंभीर अपराध माना गया है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अतिरिक्त आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्र धाराओं के अंतर्गत भी प्रकरण दर्ज करने पुलिस विभाग को लेख किया जा रहा है – जहर को पहले ही पुलिस विभाग की फॉरेंसिक टीम द्वारा जप्त किया गया है।धारा 274 BNS – मानव अथवा सार्वजनिक उपयोग हेतु जल या खाद्य पदार्थ को विषाक्त/दूषित कर जीवन एवं स्वास्थ्य को खतरे में डालना।
धारा 277 BNS – विषैले पदार्थों के माध्यम से जनजीवन एवं स्वास्थ्य को संकट में डालने वाला कृत्य,
धारा 125 BNS – मानव जीवन अथवा व्यक्तिगत सुरक्षा को संकट में डालने वाला कार्य, धारा 61(2) BNS आपराधिक षड्यंत्र एवं संगठित वन्यजीव अपराध में संलिप्तता,
धारा 3(5) BNS – समान आशय एवं सामूहिक आपराधिक उत्तरदायित्व।
वन क्षेत्र के जलस्रोत में जहर मिलाने जैसी घटना से न केवल बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, हिरण एवं अन्य दुर्लभवन्यजीवों के जीवन को खतरा उत्पन्न हुआ है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों, पशुधन एवं वन अमले की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती थी।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के अमानवीय एवं पर्यावरण विनाशकारी अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सभी लागू कानूनों के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। प्रकरण में वैज्ञानिक जांच, फॉरेंसिक परीक्षण एवं गुप्त सूचना तंत्र के माध्यम से संपूर्ण षड्यंत्र में शामिल व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।
वन विभाग ने क्षेत्र के ग्रामीणों एवं वन परिक्षेत्र के आसपास निवासरत समुदायों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, जहर डालने, अवैध शिकार अथवा वन्यजीव तस्करी से संबंधित सूचना तत्काल निकटतम वन अधिकारी को दें।
वन विभाग ने पुनः दोहराया है कि Udanti Sitanadi Tiger Reserve में बाघों एवं जैव विविधता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा वन्यजीव अपराधों के प्रति “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाई जाएगी।












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