
ओपेरा के नाम से परोसा गया उड़ीसा के कलाकार का अर्धनग्न डांस,गवाह बने खुद एसडीएम , एसडीएम ने कहा हम बंद करवाने गए थे । वीडियो हुआ वायरल ।
गरियाबंद|धर्म नगरी कहे जाने वाले उरमाल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि महिला सम्मान और सुरक्षा को लेकर सरकार के तमाम दावों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
उड़ीसा की तथाकथित “ओपेरा” कलाकार को बुलाकर खुलेआम अर्धनग्न अवस्था में अश्लील नृत्य करवाने का मामला अब गरियाबंद जिले में सुर्खियों में है। जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए 27 तारीख को एसडीएम स्तर से अनुमति दी गई थी। अनुमति के मुताबिक यह आयोजन 5 तारीख से 11 तारीख तक, कुल 6 दिनों तक चलना था।
लेकिन जब कार्यक्रम के आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तब जाकर पुलिस हरकत में आई और आयोजन को बीच में रोकना पड़ा। कार्रवाई के नाम पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया, जिन पर मंच पर कलाकार के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप लगे।


सबसे गंभीर और शर्मनाक पहलू यह है कि जिस आयोजन को अनुमति दी गई, उसी कार्यक्रम में अनुमति देने वाले अधिकारी—एसडीएम—खुद सामने बैठकर मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात भर चले इस अश्लील नृत्य में जमकर पैसा उड़ाया गया। दर्शकों से 200 से 400 रुपये तक टिकट वसूला गया, जबकि कथित तौर पर नृत्यांगना को एक रात के लिए 60 हजार रुपये का ठेका दिया गया था। फिर भी एसडीएम डॉक्टर तुलसीदास कुमार काम का कहना है अश्लील नृत्य का खबर मिलते ही हमने वहां जाकर सच्चाई देख तुरंत कार्यक्रम को बंद करवाया ।
कार्यक्रम के प्रचार के लिए उड़ीसा के सनी लियोनि के नाम से जुड़े वीडियो मैसेज गांव-गांव और सोशल मीडिया पर फैलाए गए, इसके बावजूद प्रशासन समय रहते कार्यक्रम को रोकने में नाकाम रहा। इससे साफ जाहिर होता है कि जिले में प्रशासनिक निगरानी और नैतिक जिम्मेदारी किस स्तर पर है।
एक तरफ सरकार महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की योजनाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे आयोजनों को सरकारी अनुमति मिलना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि क्या आयोजन समिति के चार सदस्यों को महज दो घंटे में जमानत मिल जाना इस तरह की अश्लीलता पर रोक है या अप्रत्यक्ष संरक्षण?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब अश्लीलता के गवाह खुद जिम्मेदार अधिकारी बनेंगे, तो इस विकासखंड में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का भविष्य क्या होगा?
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है, लेकिन गरियाबंद प्रशासन की भूमिका पर उठे ये सवाल अब जवाब मांग रहे हैं।













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