
सरगीगुड़ा के टिकनापारा में झोपड़ी के भरोसे नौनिहालों का भविष्य।
कीचड़ के बीच चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र, मासूमों की सुरक्षा पर मंडराया संकट।
न्यूज़ रिलीज़ / विशेष संवाददाता
गरियाबंद/सरगीगुड़ा: शासन-प्रशासन भले ही महिला एवं बाल विकास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण दूर करने और नौनिहालों को बेहतर प्राथमिक शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन धरातल की हक़ीक़त इसके बिल्कुल उलट है। ग्राम पंचायत सरगीगुड़ा के टेकेनापारा में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पक्का भवन न होने के कारण यह केंद्र एक कच्चे फूस व बांस की जर्जर झोपड़ी में संचालित हो रहा है, जहाँ मूसलाधार बारिश शुरू होते ही व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
बारिश में दयनीय स्थिति, हादसों की आशंका: ऐसे वातावरण में न तो मासूम बच्चे बैठने की स्थिति में हैं और न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका को पोषण आहार वितरित करने में सहूलियत मिल पा रही है। तेज़ हवा और तूफ़ान के समय झोपड़ी के गिरने का ख़तरा हर पल बना रहता है।
जहरीले जीवों और बीमारियों का डर: स्थानीय ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि झोपड़ी के आसपास जलजमाव और झाड़ियों के कारण सांप, बिच्छू व अन्य जहरीले जीवों के आने का डर लगा रहता है। सीलन भरे माहौल से बच्चों में मौसमी बीमारियों और संक्रमण फैलने का ख़तरा भी दोगुना हो गया है। अभिभावक अपने बच्चों को ऐसी स्थिति में केंद्र भेजने से कतरा रहे हैं।
आश्वासन मिला, भवन नहीं” — ग्रामीण: “टेकेनापारा में लंबे समय से आंगनबाड़ी भवन की मांग की जा रही है। हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। बारिश के दिनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर समय डर बना रहता है। ग्रामीणों क्षेत्र जगह की अभाव होने के कारण भवन नहीं बन पा रहा है।
— स्थानीय ग्रामीण, ग्राम पंचायत सरगीगुड़ा
न्यूज़ रिलीज़ की प्रशासनिक मांग: प्रशासनिक उपेक्षा के कारण मासूम बच्चे बुनियादी सुविधाओं से महरून हैं। न्यूज़ रिलीज़ जिला प्रशासन व महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए मांग करता है कि:
टेकेनापारा में शीघ्र अति शीघ्र पक्के आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की स्वीकृति दी जाए।
बारिश के वर्तमान मौसम को देखते हुए केंद्र को तत्काल किसी सुरक्षित पक्के भवन या शासकीय परिसर में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जाए।













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