आजादी के 79 साल बाद भी ‘बागपारा’ में अंधेरा: न सड़क, न बिजली।

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आजादी के 79 साल बाद भी ‘बागपारा’ में अंधेरा: न सड़क, न बिजली।


गरियाबंद,संवाददाता| गरियाबंद|देश आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत ‘सरगीगुड़ा’ का आश्रित ग्राम ‘बागपारा’ आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। पिछले 35 वर्षों से आबाद इस गांव की स्थिति ऐसी है कि यहां न पक्की सड़क है और न ही बिजली की रोशनी।

•मेड़ के सहारे जीवन:-

बागपारा में आवागमन के लिए कोई मार्ग नहीं है। ग्रामीण, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे अपने रोजमर्रा के कामों के लिए खेतों की मेड़ से गुजरने को विवश हैं। बारिश के दिनों में यह रास्ता कीचड़युक्त दलदल में बदल जाता है, आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य सुविधा तक पहुँच पाना यहाँ के निवासियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

•डिजिटल दौर में ‘चिमनियों’ के तले बच्चे:-


‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आधुनिक छत्तीसगढ़’ के दावों के बीच बागपारा के 25-30 परिवार अभी भी मोमबत्ती के सहारे रातें काट रहे हैं। बिजली न होने से जहाँ एक ओर छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर रात के अंधेरे में जहरीले जीव-जंतुओं का डर ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ाए हुए है।

•जनप्रतिनिधियों के वादे ‘हवा-हवाई’:-
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले ढाई दशकों से सरकारें बदलीं, सरपंच बदले, लेकिन बागपारा की तस्वीर नहीं बदली। हर चुनाव में नेता आते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही वे ग्रामीणों को भगवान भरोसे छोड़कर अपनी राह पकड़ लेते हैं।

•ग्रामीणों का आक्रोश:-

“क्या हमें बुनियादी सुविधाओं के लिए दशकों और इंतजार करना होगा? यदि जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं हैं,


•प्रशासन की उदासीनता पर उठते सवाल:-
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पक्की सड़क और विद्युतीकरण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे।

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