सक्ती के हसौद में बदहाल मिड-डे मील: जर्जर भवन में बन रहा बच्चों का निवाला, राशन हुआ बर्बाद।

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सक्ती के हसौद में बदहाल मिड-डे मील: जर्जर भवन में बन रहा बच्चों का निवाला, राशन हुआ बर्बाद।


संवाददाता सक्ती,सक्ती/हसौद। सक्ती जिले के हसौद स्थित शासकीय स्कूल में मिड-डे मील (मध्यान्ह भोजन) व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। यहां नन्हे-मुन्नों का भोजन किसी सुरक्षित रसोई में नहीं, बल्कि एक जर्जर और खतरनाक हो चुके पुराने स्कूल भवन में तैयार किया जा रहा है। बारिश के कारण भवन में जलभराव की स्थिति है, जिससे बच्चों का राशन पूरी तरह से भीगकर बर्बाद हो चुका है।

भवन की जर्जर स्थिति से बढ़ रहा है खतरा
जानकारी के मुताबिक, स्कूल में भोजन पकाने के लिए अलग से कोई भी व्यवस्थित किचन उपलब्ध नहीं है। विवशता में रसोइया पिछले कई समय से एक पुराने और जर्जर भवन का उपयोग कर रहे हैं। वर्तमान में लगातार हो रही बारिश के चलते इस भवन के भीतर पानी भर गया है। स्थिति इतनी खराब है कि रसोइयों को घुटनों तक पानी के बीच काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

क्या खिला रहे हैं बच्चों को?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि भवन के अंदर रखा अनाज और अन्य खाद्य सामग्री बारिश के पानी में भीग चुकी है। सीलन और गंदगी के बीच तैयार किया जा रहा यह भोजन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। हसौद के इस परिसर में हायर सेकेंडरी और मिडिल स्कूल को मिलाकर लगभग 1000 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। हालांकि, बारिश की वजह से वर्तमान में 100 से 200 बच्चों का ही भोजन तैयार किया जा रहा है, लेकिन इतने बच्चों की जान से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।

प्रशासन मौन, जवाबदेही पर सवाल
मौके पर मिली जानकारी के अनुसार, जब स्कूल का निरीक्षण करने का प्रयास किया गया, तो भवन पर ताला लगा था और रसोइया वहां मौजूद नहीं थे। स्थानीय लोगों में इस कुव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन इस जर्जर भवन में भोजन बनवाने की अनुमति देकर बच्चों की सुरक्षा के साथ बड़ा जोखिम उठा रहा है।

ग्रामीणों की मांग
स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

भोजन बनाने के लिए तत्काल वैकल्पिक और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की जाए।

जर्जर भवन की मरम्मत कराई जाए या उसे अनुपयोगी घोषित किया जाए।

मामले की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि यह पता चल सके कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही किसके स्तर पर है।

अभिभावकों की चिंता: “भवन गिर गया तो जिम्मेदार कौन होगा?” अब देखना यह है कि प्रशासन इस खबर के संज्ञान के बाद बच्चों को एक सुरक्षित रसोई मुहैया कराता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाता है

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