घोर नक्सली क्षेत्र में CRPF की तरफ से सिविक एक्शन प्रोग्राम।

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घोर नक्सली क्षेत्र में CRPF की तरफ से सिविक एक्शन प्रोग्राम।


गरियाबंद |छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब बदलाव की बयार साफ महसूस की जा रही है। सुरक्षा बल जहां एक ओर सख्त ऑपरेशन के जरिए उग्रवाद की जड़ें कमजोर कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भरोसे और विकास के जरिए ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।
इसी कड़ी में इंदागांव क्षेत्र में सीआरपीएफ की 211वीं बटालियन ने एक बड़ा सिविक एक्शन कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया।

इंदागांव थाना क्षेत्र के दूरस्थ गांव में आयोजित इस शिविर में 500 से अधिक ग्रामीणों की मौजूदगी रही।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, जहां 400 से ज्यादा ग्रामीणों की चिकित्सकीय जांच की गई।
डॉ. डी. तपस्विनी और उनकी टीम ने ग्रामीणों को परामर्श देने के साथ आवश्यक दवाइयां भी मुफ्त वितरित कीं।
स्वास्थ्य सुविधा से वंचित इस इलाके के लोगों के लिए यह पहल बड़ी राहत साबित हुई।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, स्वच्छता और खेल को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया।
स्कूल के बच्चों को मनोरंजन और पढ़ाई के लिए एलईडी टीवी प्रदान किया गया।
स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 8 सिंटेक्स पानी टंकियां सौंपी गईं।
बच्चों को स्कूल ड्रेस, बैग, कॉपी-किताब, स्टेशनरी और स्टील के बर्तन वितरित किए गए।
महिलाओं को साड़ी और घरेलू उपयोग की सामग्री, पुरुषों को लूंगी और गमछा, युवाओं को खेल सामग्री — जिसमें वॉलीबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट किट शामिल है — दी गई।
वहीं बुजुर्गों को कंबल और चप्पल जैसी आवश्यक वस्तुएं प्रदान की गईं।


सीआरपीएफ 211वीं बटालियन के कमांडेंट विजय प्रताप ने बताया कि ऐसे सिविक एक्शन कार्यक्रमों का क्षेत्र में सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का विश्वास सुरक्षा बलों के प्रति लगातार मजबूत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जो लोग किसी कारणवश भटक गए हैं, उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए विकास और संवाद दोनों जरूरी हैं।
सुरक्षा बलों की मानें तो इन पहलों के चलते नक्सलियों को स्थानीय स्तर पर मिलने वाला समर्थन कम हुआ है, जिससे उनके मनोबल पर भी प्रभाव पड़ा है।

गरियाबंद के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है।
जहां एक ओर बंदूक की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर भरोसे और विकास का संदेश भी दिया जा रहा है।
सवाल यह है कि क्या ये प्रयास लंबे समय तक शांति और स्थायित्व की नई इबारत लिख पाएंगे?
फिलहाल, इंदा गांव से आई ये तस्वीरें बदलाव की उम्मीद जरूर जगा रही हैं।

डॉ डी तपस्विनी
विजय प्रताप, कमांडेंट, सीआरपीएफ 211वीं बटालियन

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