
धर्मध्वजा के साथ विकास की घोषणा, सिरकट्टी आश्रम से मुख्यमंत्री का संकल्प।
गरियाबंद| जिले के प्रसिद्ध सिरकट्टी आश्रम में श्रीराम–जानकी मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा स्थापना एवं कलश पूजन का भव्य धार्मिक आयोजन श्रद्धा, आस्था और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं धर्मध्वजा की स्थापना की। सिरकट्टी आश्रम की ओर से मुख्यमंत्री का आत्मीय एवं गरिमामय स्वागत किया गया।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं एवं जनप्रतिनिधियों को धर्मध्वजा स्थापना और कलश पूजन की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगभग 500 गांवों और 20 हजार लोगों के सामूहिक प्रयास तथा करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से प्रभु श्रीराम–जानकी मंदिर की स्थापना अपने आप में अद्भुत और प्रेरणादायक कार्य है। यह आयोजन समाज की सामूहिक आस्था, एकता और धर्म के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। को
मुख्यमंत्री ने सिरकट्टी आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन श्री श्री 108 संत श्री सियाभुवनेश्वरी शरण व्यास जी को नमन करते हुए कहा कि संतों के तप, त्याग और मार्गदर्शन से ही समाज को सही दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं की भूमि है, जहां 33 कोटि देवताओं की आस्था है। 84 लाख योनियों के बाद प्राप्त मानव जीवन को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए, बल्कि धर्म, सेवा और सद्कर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाना चाहिए।मुख्यमंत्री ने माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि केवल पूजा-पाठ, यज्ञ या चढ़ावे से भगवान प्रसन्न नहीं होते, बल्कि माता-पिता की सेवा और सम्मान से भगवान प्रसन्न होते हैं। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि अपने जीवन में इस मूल मंत्र को अपनाएं।
छत्तीसगढ़ को प्रभु श्रीराम का ननिहाल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने अपने 14 वर्षों के वनवास का अधिकांश समय दंडकारण्य क्षेत्र, वर्तमान छत्तीसगढ़ में बिताया। अबूझमाड़ क्षेत्र भी उनके वनवास काल से जुड़ा है। मां शबरी के मीठे बेर भी शिवरीनारायण में भगवान राम ने ग्रहण किए थे, जिससे यह भूमि ऐतिहासिक और पवित्र है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार ने मोदी की गारंटी के अनुरूप हर वादा पूरा किया है। उन्होंने धान खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल, महतारी वंदन योजना की 23 किश्तों के माध्यम से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजे जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सारंगढ़ क्षेत्र में महिलाएं महतारी वंदन योजना की राशि से भगवान राम का मंदिर निर्माण कर रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने रामलला दर्शन योजना, पांच शक्तिपीठों के जीर्णोद्धार, भोरमदेव मंदिर के लिए 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति तथा रतनपुर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सनातन संस्कृति को सशक्त करने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या, काशी और उज्जैन जैसे तीर्थों का कायाकल्प हुआ है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि धर्मध्वजा स्थापना कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि धर्मराज की स्थापना की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि धर्म के अनुरूप आचरण ही क्षेत्र के विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री खुशवंत साहब ने कहा कि अयोध्या के बाद यहां धर्मध्वजा की स्थापना देखना आत्मीय सुख की अनुभूति है। उन्होंने शिक्षा, संस्कार और संस्कृति को जीवन के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
विधायक रोहित साहू ने इस क्षण को पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य का अवसर बताते हुए भगवान श्रीराम से क्षेत्र के विकास की कामना की। संत राम सुंदर दास, मठ महंत गोवर्धन शरण महाराज सहित संतों ने धर्मध्वजा को सनातन संस्कृति के जागरण का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में बेमेतरा विधायक दीपेश साहू, जिला अध्यक्ष अनिल चंद्रकार जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, जिला पंचायत सदस्य शिवांगी चतुर्वेदी, आयोग अध्यक्ष विकास मरकाम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने समरसता भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा करते हुए आगे भी विकास कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया।














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