
धान तौल में अनियमितता उजागर, पत्रकारों से अभद्रता का गंभीर आरोप,कड़ार धान मंडी में नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां, कैमरा छीनने तक की घटना।
कड़ार (बिलासपुर जिला रिपोर्ट) संवाददाता डिकलेश कुमार कुलदीप:शासन द्वारा धान खरीदी के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनके तहत 40 किलो धान पर 700 ग्राम से अधिक किसी भी प्रकार की कटौती अवैध मानी जाती है। इसके बावजूद जिले की कई धान मंडियों में किसानों से कथित रूप से अतिरिक्त कटौती किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला कड़ार धान मंडी से सामने आया है, जहाँ तौल में गड़बड़ी पकड़ में आने पर मंडी प्रबंधन पर पत्रकारों से अभद्रता करने और सबूत मिटाने का आरोप लगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कड़ार धान मंडी में कवरेज के लिए पहुँचे पत्रकारों ने तौल प्रक्रिया के दौरान 1 किलो तक अतिरिक्त कटौती को कैमरे में रिकॉर्ड किया। आरोप है कि यह कटौती ‘सूक्ति’ के नाम पर की जा रही थी, जबकि शासन के निर्देशों में इसकी कोई अनुमति नहीं है।
जब पत्रकारों ने इस अनियमितता को लेकर सवाल किए, तो मंडी प्रबंधक विवेक शर्मा और मंडी अध्यक्ष संजय दुबे ने पहले कथित रूप से पत्रकारों को चुप कराने के लिए प्रलोभन देने की कोशिश की। पत्रकारों के इनकार करने पर स्थिति और गंभीर हो गई। आरोप है कि दोनों ने खुलेआम पत्रकारों से अभद्र भाषा में बातचीत की और कैमरे छीनने की कोशिश की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान कैमरे को नुकसान भी पहुँचा, जिससे यह संदेह गहराता है कि सबूत नष्ट करने का प्रयास किया गया। आरोप यह भी है कि स्वयं को एक राजनीतिक दल का नेता बताकर दबाव बनाने और गुंडागर्दी करने की कोशिश की गई।
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व धान मंडी कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की गई थी, जिसमें धान का शीघ्र उठाव नहीं होने से नुकसान होने की बात कही गई थी। शासन द्वारा उनकी मांगों को मानते हुए धान का उठाव तेज़ी से कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब धान समय पर उठाया जा रहा है, तो फिर ‘सूक्ति’ के नाम पर किसानों से अतिरिक्त 1 किलो धान किस आधार पर लिया जा रहा है।
स्थानीय किसानों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था किसानों की मेहनत पर डाका डालने जैसी है। वहीं, मीडिया जो दिन-रात शासन की योजनाओं और व्यवस्थाओं को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करती है, उसी मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
अब यह मामला प्रशासन और संबंधित विभागों के संज्ञान में है। आवश्यकता इस बात की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि न किसानों का शोषण हो और न ही पत्रकारों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा सके।












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